मेरी डायरी के पन्ने (1)
ऐ जिन्दगी
एक और मंजिल नई दिख रही है राह में ऐ जिन्दगी
सांझ अभी ढली नही कांरवा अभी थमा नही है ऐ जिन्दगी ॥
मुस्कुराके ग़मों का घूंट पीना जिसको आ गया ऐ जिन्दगी
ये सच है कि जंहा में , जीना उसे आ गया ऐ जिन्दगी॥
जा मेरी अधुरी ख्वाहिशों से कह दे अब, तू ऐ जिन्दगी
अपनी नही तो दूसरों की ख्वाहिशों के लिए जीना आ गया है ऐ जिन्दगी ||
मेरी ख्वाहिशों का क्या,कांरवां गुज़र रहा है ऐ जिन्दगी
मेरी चाहत में निशाँ बच रहे है या कांरवा ठहर रहा है ऐ जिन्दगी ॥
तमाम उम्र ख्वाहिशें मेरी,मुझे राह दिखाती रही ऐ जिन्दगी
उसे भी व तुझे भी, कभी अपनी मंजिल का पता न था ऐ जिन्दगी ॥
मेरी ख्वाहिशें ही मुझसे कभी वफा न कर सकी ऐ जिन्दगी
मैनें जतन तो बहुत किये उन्हें पाने के लिए ऐ जिन्दगी ॥

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ReplyDeleteधन्यवाद
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